वही है दर्द, वही दिल वही है, शम-ए- खेयाल
उसी का ज़िक्र मुसलसल है ज़िन्दगी मेरी
कभी है साज़, कभी सोज़, तो कभी नगमा
बदलती रंग ये हर पल है जिंदगी मेरी
वो अपने हुस्न को महसूस करगई शयेद
जभी तो शोख है ,चंचल है ज़िन्दगी मेरी
ज़रा सा पांव क्या रक्खा के फिर निकल न सके
ये ख्वाहिशात का दलदल है ज़िन्दगी मेरी
कुछ इसतरह से ये बहती रही पता न चला
हवा है, आब या , बादल है ज़िन्दगी मेरी
ये मेरे शेर, ये ग़ज़लें "वसी " उसी केलिए
उसी की आँख का काजल है ज़िन्दगी मेरी.
उसी का ज़िक्र मुसलसल है ज़िन्दगी मेरी
कभी है साज़, कभी सोज़, तो कभी नगमा
बदलती रंग ये हर पल है जिंदगी मेरी
वो अपने हुस्न को महसूस करगई शयेद
जभी तो शोख है ,चंचल है ज़िन्दगी मेरी
ज़रा सा पांव क्या रक्खा के फिर निकल न सके
ये ख्वाहिशात का दलदल है ज़िन्दगी मेरी
कुछ इसतरह से ये बहती रही पता न चला
हवा है, आब या , बादल है ज़िन्दगी मेरी
ये मेरे शेर, ये ग़ज़लें "वसी " उसी केलिए
उसी की आँख का काजल है ज़िन्दगी मेरी.

