Showing posts with label Hindi poem. Show all posts
Showing posts with label Hindi poem. Show all posts

Friday, January 9, 2009

Zindagi

वही है दर्द, वही दिल वही है, शम-ए- खेयाल
उसी का ज़िक्र मुसलसल है ज़िन्दगी मेरी
कभी है साज़, कभी सोज़, तो कभी नगमा
बदलती रंग ये हर पल है जिंदगी मेरी
वो अपने हुस्न को महसूस करगई शयेद
जभी तो शोख है ,चंचल है ज़िन्दगी मेरी
ज़रा सा पांव क्या रक्खा के फिर निकल न सके
ये ख्वाहिशात का दलदल है ज़िन्दगी मेरी
कुछ इसतरह से ये बहती रही पता न चला
हवा है, आब या , बादल है ज़िन्दगी मेरी
ये मेरे शेर, ये ग़ज़लें "वसी " उसी केलिए
उसी की आँख का काजल है ज़िन्दगी मेरी.

Thursday, January 8, 2009

my life in my poetry

अपने एहसास के शीशे में संवर लेता हूँ
मैंने तो ख़ुद को ही आईना बना रक्खा है .

मैं इक खुद्दार था मुट्ठी को अपनी बंद ही रक्खा
नहीं तो बारहा रिशवत मेरी मुट्ठी में आई थी.

मेरा दावा है मुझ से ए हवा तू हार जाऐगी
मैं यादों का दिया हूँ जलते रहना मेरी आदत है .


जुनूं में गिर के बिखरना ये मेरी फितरत है
मुझे ये ढंग सिमटने का यूं न सिखलाओ
चमक रहा हूँ तो उसकी वजह भी है मालूम
मैं आइना हूँ मुझे आइना न दिखलाओ.


मंजिल अभी करीब दिखी दिख के खो गई
हाँ जेएनयू में दिल का सफर एक कशमकश
आशिक की हसरतों में डुबी दिल की धड़कनें
माशूक की वो तिरछी नज़र एक कशमकश.

Monday, January 5, 2009

Sabarmati Hostel, JNU (farewell Poem)

साबरमती Hostel of J.N.U
के
बहुत ही सीनियर गार्ड
रना
जी की विदाई पर एक नज़्म-
"
राणा जी की याद में"


हर इक दिन कुछ घड़ी, कुछ पल हम उनके साथ रहते हैं
मुहब्बत से उन्हें हम लोग तो राणा जी कहते हैं
अगर देखें वह औरों से कई वजहों से बेहतर हैं
वोह मरदे नातवां साबरमती के गेट कीपर हैं
बस उन की इक हँसी पर सारे लड़के हंसने लगते हैं
कभी भी मूड में गपशप अगर वो करने लगते हैं
कभी वो शौक़ से किस्से जवानी के सुनाते हैं
बहुत ही फख्र से ख़ुद को वो इक फौजी बताते हैं
मेरा नेपाल घर है गर कोई पूछे तो कहते हैं
वह अक्सर बात में सा की जगह पर शा ही कहते हैं
जब उनके हाथ में देखा था तम्बाकू तो ऐ यारब
वो शरमा के ये बोले मुझसे और कहिये वशी शाहब
ज़रा शा आप भी ले लें अगर जो शौक़ रखते हैं
मुहब्बत से उन्हें हम लोग तो राणा जी कहते हैं
था उनका काम मजलूमों को हरदम हौसला देना
सभी लोगों को गर मुमकिन हो अच्छा मशवरा देना
खेलाफ़-ऐ-अक्ल बातों पे उन्हें गुस्सा भी आता है
ज़रा रह रह के यूँ पारा भी उनका चढ़ता जाता है
कोई हाकर अगर इक बार कहने से नहीं माना
तो वो गुस्से में कहते सुन लो मेरा नाम है राणा
कभी देखा अगर कुत्ता तो वो गुस्से में ये बोले
तेरी ऐशी की तैशी,रुक ज़रा..अब भी नहीं डोले !
सुबह हो शाम हो वोह जब तलक डयूटी पे रहते हैं
सभी कुत्ते हमेशा उनकी परछाईं से डरते हैं
खड़े बस दूर से ही दुम हिलाते तकते रहते हैं
मुहब्बत से उन्हें हम लोग तो राणा जी कहते हैं
हुआ इक हादसा तो सबने पूछा के वजह क्या है
वो बोले और क्या सुनियेगा अब बाकी बचा क्या है
लड़ाई रोकने को मैं इधर मौके पे जा पहुँचा
तो इक दूजा उधर से लड़कयों की विंग में आ पहुँचा
वोह घुस कर रूम में इक बेड के नीचे छुप गया ऐसे
के जैसे सांप हो बोरी के नीचे घुस गया जैसे
कोई बनता है शैदाई कोई बनता है दिलवाला
इन्हीं लोगों ने तो जीना मेरा मुश्किल है कर डाला
हजारों लोग आते हैं कई काले कई गोरे
बहुत ही तंग करते हैं ये हमको नौजवां छोरे
खुदा जाने ये पढ़ते भी हैं या बस यूँ ही फिरते हैं
मुहब्बत से उन्हें हम लोग तो राणा जी कहते हैं

Wasi Bastavi